विस्वाश

                                                विस्वाश  

ये एक कहानी है एक ऐसे लड़के की जिसके सपने बहुत बड़े और हैसियत बहुत छोटी थी
उस लड़के के अंदर से महसूस करके में ये कहानी लिखने जा रहा हु .
मेरा नाम महेश है और मेरी लाइफ में मेने बहुत परेशनी देखि और न जाने कितनी बार विश्वास टूटा
लोगो को लगता है यार बचपन की लाइफ कितनी मजेदार होती है पर में कहता हु बचपन से ज्यादा
परेशान लाइफ दूसरी नहीं |

पैदा होते ही हमे अपनी भूख प्यास से जूझना पड़ता है हर बात के लिए एक ही इशारा रोना बस रोना
अगला समज ही नहीं पता की इसको क्या चाहिए बहुत ही परेशानी ही 3 साल तक इसी को झेलते
रहना है फिर घर वाले स्कूल डाल देंगे और न जाने क्या क्या बना देंगे कोई डॉ बना देंगे कोई पूछो मत
कितनी परेशनी है उस लाइफ में , एक ऐसी लाइफ जिसमे हम सबपे इतनी आसनी से यकीन कर
लेते है मानो वही सुब अपना हो फिर क्या कोई टॉफी की लालच में हमारा अपहरण करता है कोई
अपनी दुश्मनी निकल लेता है |

बहुत तकलीफ है बचपन में , बहुत सपने है , बहुत उड़ना बाकि है अभी लाइफ में बस जरुरत है सही
गुरु की और सही गुरु और बिना मिलावट की चीज मिलना मुमकिन ही नहीं लगता है कुछ भी चाहिए
अपनी मां से मांगो , माँ ना दे तो हमे अपनी सारी उमीदे अपने पापा पे नजर आती है और हमारे पापा उन्ही सपने को पूरा करने में अपना दिन रात भूल कर अपने सारे सपने खो देते है ना जाने कितने सपने अपने
सीने में दफन कर बस जी रह है मानलो जैसे एक कटपुतली अपने मालिक के इशारे पे नाच रही हो|

पर इसका अहसास आपको जब होता है जब आपका बचपन जा चूका होता है , बचपन में आपको ये नहीं पता होता की आप जो वो मांग रहे हो क्या उसको दिलाने की हैसियत है भी नहीं , हैशियत होती है तो दिला देते है और नहीं होती तो अपना गुस्सा हम पर उतर जाते है और फिर पछताते है ऐसी है कुछ हमारी बचपन की लाइफ , बस कहने को ही है बचपन में मजे है |

अब बात आयी स्कूल की अब का तो फिर भी सही है पर पहले के स्कूल थर्ड डिग्री से कम नहीं होते थे ,
ना जाने मास्टर कहा से सजा ढून्ढ के लाते थे इतना तो कोई वैज्ञानिक भी खोज नहीं करता था ना जाने कहा से ढून्ढ थे ये लोग..

स्कूल में होमवर्क भी स्कूल की छुट्टी के बाद से ही पीछे पड़ जाता है और वो स्कूल का बेग हमारे नाजुक कंधे
तो झुका देंगे और फिर ना जाने किस दौड़ में लगजाते है हम लोग , नम्बरो के चिंता , पड़ोस के बच्चे की चिंता की उसके कितने बने ,हा कॉलेज आके थोड़ी चिंता ख़त्म होती है |

पर वह से सुरु होती फ्यूचर बनाने की होड़ , वो टाइम फैसला लेता है की हम अपनी लाइफ में क्या बनेंगे
गलत संगत में लग गए तो बदमाश और सही में लग गए तो कुछ ना कुछ तो बन ही जायेंगे .और कुछ बन गए तो मिस करते है हम वो अपनी बचपन वाली लाइफ जो हमे अच्छी लगने लगती है जब हम उस से निकल जाते है और वापिस लौटना नामुमकिन है |

में इतना खो गया उन बचपन की यादो में की में भूल ही गया में अपने बारे में लिख रहा था .
जितनी मेरी उम्र नहीं उस से ज्यादा व्यापार कर चूका हु शायद ऐसा कोई व्यापार नहीं बचा जो मेने नहीं किया सब्जी बेचने से गारमेंट्स और भी बहुत है क्या क्या बताऊ |

और इन को चलाने के लिए ना जाने कितने भगवानो के पीछे भागा , सुब को खुश करना है कहि कोई नाराज ना हो जाये बहुत कुछ किया कभी किसी के सामने अगरबत्ती तो कभी कहि पे नारियल बहुत जगह
देवताओ के यहां पूछा की कोई तो मेरा व्यापार चला दो पता नहीं क्या था शायद कहि में ही गलत था या मेरी ही पूजा में कोई दिक्क्त होगी जो में कुछ भी नहीं कर पा रहा . बहुत बार सोचा क्या करू |

बहुत बार गलत फैसले लेने को दिल ने सोचा की कुछ गलत करलु पर एक परिवार आ जाता है बिच में और फैसले बदल जाते है . पर मेरे दोस्त में हार नहीं मानूंगा और मेरी साथियो से कहना है की हार नहीं मानो ये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा , कोसिस करते रहो , कोसिस करते रहो , बस कोसिस करते रहो
तुम ही जीतोगे हा तुम ही जीतोगे ,

तुम यहां गिरने नहीं आये हो तुम यहां उड़ने आये हो और तुम्हारी उड़ान को कोई नहीं रोक सकता , बिलकुल नहीं रोक सकता , और रोकेगा भी तो तो हम उसको रोकने नहीं देंगे ,ज्यादा टाइम नहीं हमारे पास हमे उड़ना है चील से भी उचा बहुत उचा .

बस यार बहुत पका लिया पसंद आये तो लाइक करदे और नहीं आये तो भी लाइक करदे फ्री है

29 thoughts on “विस्वाश”

  1. Thank you for sharing your thoughts. I truly appreciate your efforts and I will be waiting for your further write ups thank you once again.| Lanie Hamel Ranson

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